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डॉ. लेख रंजन बी पात्रो राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार से हुए अलङ्कृत

संस्कृत कृति "नवरात्र महात्म्यम्" के लिए मिला पुरस्कार

सरायपाली: डॉ. लेख रंजन बी पात्रो, जो इग्नाइट इंग्लिश मीडियम स्कूल, वीरेंद्र नगर, सरायपाली में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं, को उनकी संस्कृत कृति “नवरात्र महात्म्यम्” के लिए राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें संस्कृत साहित्य में उनके अद्वितीय योगदान और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन के लिए दिया गया है। इस सम्मान ने न केवल डॉ. पात्रो की व्यक्तिगत उपलब्धि को उजागर किया है, बल्कि उनके क्षेत्र और समुदाय का भी गौरव बढ़ाया है।

डॉ. लेख रंजन बी पात्रो का जन्म तोषगाँव (सरायपाली) में हुआ था। वे स्वर्गीय गुलाबी पात्रो एवं स्वर्गीय लोकनाथ बी पात्रो के पुत्र हैं। अपने माता-पिता के संस्कारों और प्रेरणा से प्रेरित होकर, उन्होंने शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त की है। उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण ने उन्हें इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान तक पहुंचाया।

डॉ. पात्रो की संस्कृत कृति “नवरात्र महात्म्यम्” नवरात्रि पर्व के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को समर्पित है। इस ग्रंथ में उन्होंने नवरात्रि के विभिन्न पहलुओं, देवी के विभिन्न रूपों, और उनके पूजन की विधियों का गहन विवेचन किया है। यह कृति न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि संस्कृत भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में भी एक महत्वपूर्ण योगदान है। इस कृति के माध्यम से डॉ. पात्रो ने भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया है।

इग्नाइट इंग्लिश मीडियम स्कूल में शिक्षक के रूप में डॉ. पात्रो ने शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। वे न केवल विद्यार्थियों को ज्ञान प्रदान करते हैं, बल्कि उनमें संस्कार और नैतिकता का भी विकास करते हैं। उनके शिक्षण के तरीके और विद्यार्थियों के प्रति उनकी संवेदनशीलता ने उन्हें विद्यालय में एक आदर्श शिक्षक के रूप में स्थापित किया है। इसके अलावा, वे संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

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राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार प्राप्त करना डॉ. पात्रो के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो उनकी मेहनत, लगन और समर्पण का परिणाम है। इस पुरस्कार के माध्यम से उन्हें न केवल राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है, बल्कि उनके क्षेत्र और समुदाय का भी नाम रोशन हुआ है। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य, सहकर्मी शिक्षकों ने डॉ. पात्रो की उपलब्धियों की प्रशंसा की।

डॉ. पात्रो की यह उपलब्धि उनके परिवार और क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। उनके माता-पिता स्व. गुलाबी पात्रो एवं स्व. लोकनाथ बी पात्रो की भी इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिन्होंने अपने पुत्र को हमेशा प्रेरित किया और उसके सपनों को साकार करने में मदद की। उनकी संस्कृत कृति “नवरात्र महात्म्यम्” और इस राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार ने उन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में एक मिसाल बना दिया है।

अंत में, डॉ. पात्रो की यह उपलब्धि भारतीय संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता की एक प्रेरणादायक कहानी के रूप में हमेशा याद रखी जाएगी।

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